नर्मदा के प्रमुख प्राकृतिक स्थल
- अमरकंटक: नदी का उद्गम क्षेत्र और धार्मिक तीर्थ।
- कपिलधारा: अमरकंटक के निकट स्थित प्रसिद्ध जलप्रपात।
- भेड़ाघाट: संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच नर्मदा का सुंदर प्रवाह।
- धुआँधार जलप्रपात: जबलपुर के निकट नदी का प्रसिद्ध जलप्रपात।
- सरदार सरोवर क्षेत्र: गुजरात में सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत के लिए महत्त्वपूर्ण नदी परियोजना।
नर्मदा नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ
नर्मदा नदी के बेसिन में अनेक सहायक नदियाँ हैं, जो वर्षा का जल मुख्य नदी तक पहुँचाती हैं। केंद्रीय जल आयोग के नदी-बेसिन संबंधी विवरणों में तवा, बंजर, शक्कर, हिरन, ओरसंग और करजन जैसी नदियों का उल्लेख मिलता है।- तवा: नर्मदा की प्रमुख सहायक नदी तवा बाँध और सिंचाई परियोजना के लिए प्रसिद्ध।
- बंजर: मध्य प्रदेश के वन और पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़ी नदी।
- शक्कर: मध्य नर्मदा बेसिन की महत्त्वपूर्ण सहायक नदी।
- हिरन: नर्मदा में मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों में से एक।
- ओरसंग: गुजरात क्षेत्र में नर्मदा की प्रमुख सहायक नदी।
- करजन: गुजरात के नर्मदा बेसिन में महत्त्वपूर्ण नदी।
- बुरहनेर: ऊपरी नर्मदा बेसिन की सहायक नदी।
- बारना: मध्य प्रदेश के नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र की नदी।
नर्मदा नदी का धार्मिक और पौराणिक महत्त्व
नर्मदा की उत्पत्ति की पौराणिक कथा:हिंदू पौराणिक परंपरा में नर्मदा को देवी और भगवान शिव से संबंधित पवित्र नदी माना गया है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, नर्मदा की उत्पत्ति भगवान शिव के तप या उनके शरीर से निकले दिव्य जल से हुई। विभिन्न पुराणों में इस कथा के अलग-अलग रूप मिलते हैं। नर्मदा को रेवा नाम से भी जाना जाता है। एक प्रचलित व्याख्या में यह नाम नदी के चट्टानों पर उछलते-कूदते प्रवाह से जोड़ा जाता है। नर्मदा की महिमा का वर्णन स्कंद पुराण के रेवा खंड तथा मत्स्य पुराण जैसी धार्मिक परंपराओं में मिलता है। इन ग्रंथों में नदी के तट पर स्नान, दान, तपस्या और तीर्थयात्रा के महत्त्व का वर्णन किया गया है।
नर्मदा और भगवान शिव:
नर्मदा का भगवान शिव से विशेष संबंध माना जाता है। इसके तट पर अनेक शिव मंदिर और ज्योतिर्लिंग तीर्थ स्थित हैं। नदी से प्राप्त कुछ प्राकृतिक, अंडाकार या लिंगाकार पत्थरों को बाणलिंग कहा जाता है। शैव परंपरा में इनका विशेष धार्मिक महत्त्व है।
नर्मदा परिक्रमा:
नर्मदा परिक्रमा नर्मदा नदी से जुड़ी एक विशिष्ट तीर्थयात्रा है। इसमें श्रद्धालु नदी के एक तट से उद्गम या निर्धारित आरंभिक स्थल की ओर यात्रा करते हुए दूसरे तट से लौटते हैं और परंपरा के अनुसार नदी की परिक्रमा पूर्ण करते हैं।
परिक्रमा की परंपरा में सामान्यतः निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाता है:
- नदी के तट के साथ पैदल यात्रा करना।
- नदी को माता के रूप में सम्मान देना।
- तीर्थस्थलों, आश्रमों और मंदिरों में दर्शन करना।
- यात्रा के दौरान संयम, साधना और सेवा को महत्त्व देना।
- परंपरा के अनुसार नदी को पार करने तथा यात्रा पूर्ण करने के नियमों का पालन करना।
नर्मदा नदी के प्रमुख तीर्थस्थल
- नर्मदा उद्गम मंदिर: अमरकंटक नर्मदा का उद्गम क्षेत्र है। यहाँ नर्मदा उद्गम कुंड और मंदिर परिसर में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। यह नर्मदा परिक्रमा का प्रमुख आरंभिक और धार्मिक केंद्र है।
- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: नर्मदा के मध्य स्थित द्वीप क्षेत्र में ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ ममलेश्वर मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। नर्मदा परिक्रमा में इस क्षेत्र का विशेष स्थान है।
- महेश्वर घाट: महेश्वर अपने ऐतिहासिक किले, मंदिरों और सुंदर नदी-तट के लिए प्रसिद्ध है। रानी अहिल्याबाई होलकर ने इसे अपने शासनकाल में प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया। यहाँ के घाट नर्मदा की धार्मिक परंपरा और स्थापत्य विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- भेड़ाघाट और धुआँधार जलप्रपात: भेड़ाघाट में नर्मदा संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच बहती है। पास का धुआँधार जलप्रपात नदी के तेज प्रवाह और जल की फुहारों के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, भूविज्ञान और पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
- भरूच: भरूच नर्मदा के मुहाने के निकट स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक नगर है। नदी और समुद्री व्यापार के कारण इसका आर्थिक महत्त्व लंबे समय से रहा है। नर्मदा अंततः भरूच के निकट खंभात की खाड़ी के रास्ते अरब सागर में मिलती है।
- गरुड़ेश्वर: गरुड़ेश्वर नर्मदा के तट पर स्थित प्रमुख धार्मिक क्षेत्र है। यहाँ मंदिरों और नदी-तट की धार्मिक परंपराओं के साथ सरदार सरोवर क्षेत्र के निकट होने के कारण भी लोगों की आवाजाही रहती है।
नर्मदा नदी के बारे में महत्त्वपूर्ण तथ्य
- अन्य नाम: रेवा
- उद्गम: अमरकंटक पठार, मध्य प्रदेश
- कुल लंबाई: लगभग 1,312 किमी
- प्रवाह की दिशा: मुख्यतः पश्चिम की ओर
- पर्वत श्रेणियाँ: विंध्य और सतपुड़ा के बीच की घाटी
- प्रमुख सहायक नदियाँ: तवा, बंजर, शक्कर, हिरन, ओरसंग, करजन
- समुद्र में मिलन: खंभात की खाड़ी, अरब सागर
- प्रमुख धार्मिक स्थल: अमरकंटक, ओंकारेश्वर, महेश्वर
- प्रमुख तीर्थ परंपरा: नर्मदा परिक्रमा
- विशेष प्राकृतिक स्थल: भेड़ाघाट, धुआँधार जलप्रपात







