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Sixteen Sacraments of Life

Subh Singh
Invent the Future
जीवन के चतुर्मुखी विकास के लिए सोलह संस्कार १. घर में खासकर स्त्रियों द्वारा पान के प्रयोग से सदा श्री और भाग्य का वास होता है। २. शौच के उपरांत चरण ना धोने से कलयुग का प्रभाव होने से दुर्दिन का आरंभ होता है। ३. गीले पाँव शय्या पर जाने से कुविचार का प्रोत्साहन और दरिद्रता को आमन्त्रण प्राप्त होता है। ४. निर्जन स्थान पर अकेले नहीं सोना चाहिए, इससे शत्रु घात का भय रहता है। ५. घर में सेवक, प्रहरी अथवा छात्र को जरुरत से ज्यादा नहीं सोना चाहिए। ६. पूर्ण रूप से अंधेरे में नहीं सोना चाहिए जिससे नाकारात्मक शक्तियों का प्रभाव नहीं होता। ७. श्मसान में सोने से नाकारात्मक ऊर्जाओं से प्रभावित होने का डर रहता है। ८. शय्या पर भोजन करने से अस्वस्थता एवं मृत्यु का योग बनता है। ९. निःवस्त्र निंद्रा ना करें क्यूंकि इससे महादेव का अपमान होता है। १०. भोजन के उपरांत मुँह स्वच्छ करेने से रोग का डर कम होगा है। ११. उत्तर दिशा में सिर करके सोने से पैर दक्षिण की ओर रहता है जो दक्षिण में रहने वाले हमारे पूर्वजों एवं कालभैरव का अपमान है, जिनके कोप से मृत्यु नहीं हुआ तो मानसिक असंतुलन होना अनिवार्य है। १२. पश्चिम दिशा में सिर रखकर सोने से चिंताओं में वृद्धि होती है। १३. छात्रों को पूर्व दिशा में सिर रखकर सोने से ज्ञान और विद्या सहज प्राप्त होती है। १४. छात्रों के अलावा सभी को दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए जिससे उन्हें धन, विद्या, यश, स्वस्थ, दीर्घायु सभी कुछ सहज प्राप्त होती है। १५. सोते समय सर्वप्रथम कम से कम एक प्रहर (३ घंटे) दाहिने ओर मुख करके सोने से गहरी निद्रा प्राप्त करता है और सुखी रहता है। १६. ब्रह्म महुर्त में प्राण वायु का प्रवाह होता है और ब्रह्म महुर्त में जागने वाला व्यक्ति निरोगी और दीघार्यु बनता है।